श्री काली चालीसा (Shri Kali Chalisa)
श्री काली चालीसा एक शक्तिशाली और पवित्र स्तोत्र है, जिसमें माँ काली की महिमा, शक्ति, रक्षा स्वरूप और दुष्टों के संहार करने वाली दिव्य रूप का वर्णन मिलता है। श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ इसका नियमित पाठ करने से भय, नकारात्मक शक्तियाँ, बाधाएँ और जीवन के संकट दूर होते हैं। यह स्तोत्र साधक को साहस, आत्मबल, सुरक्षा और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। विशेष रूप से अमावस्या, नवरात्रि, काली पूजा, और कठिन समय या शत्रु भय के दौरान इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है। माता काली की कृपा से जीवन में रक्षा, विजय और आंतरिक निर्भयता प्राप्त होती है। 🙏

दोहा
जय काली कलकत्तेवाली, जय महाकाली माँ।
दुष्ट दलन करुणा सागर, राखो अपनी शरणा॥
चौपाई
जय जय जय काली भवानी।
करो कृपा अम्बे जगदानी॥
आदि शक्ति तुम जग की माता।
तुम बिन कौन करे जग त्राता॥
कालरात्रि स्वरूप तुम्हारा।
हर लेती संकट भारी सारा॥
रक्तबीज संहारी माता।
भक्तन हित सदा सुखदाता॥
शुम्भ निशुम्भ दानव मारे।
देव बचाए कष्ट निवारे॥
खड्ग खप्पर त्रिशूल विराजे।
भाल चंद्र अरु मुण्डमाल साजे॥
नील वर्ण अति रूप भयाना।
देख दैत्य दल भागे आना॥
भैरव संग सदा तुम रहती।
भक्त जनों की पीड़ा हरती॥
दीनन पर तुम दया दिखाती।
संकट में तत्क्षण दौड़ी आती॥
भूत प्रेत बाधा सब टारे।
नाम जपत भय दूर हमारे॥
रोग शोक दरिद्र मिटाओ।
जीवन में सुख शांति लाओ॥
साहस बल बुद्धि की दाता।
तुम हो भवसागर से त्राता॥
जो जन तुमको सुमिरन करता।
उसका जीवन सफल ही होता॥
काली नाम बड़ा सुखकारी।
सुनते मिटे विपदा भारी॥
रक्त चामुंडा रूप तुम्हारा।
दुष्ट विनाश करे एक पलक सारा॥
महाकाल संग लीला रचती।
सृष्टि रक्षा हेतु विचरती॥
अष्ट सिद्धि नव निधि की दाता।
सब सुख देने वाली माता॥
भक्तन की लाज सदा तुम राखो।
कृपा दृष्टि अब हम पर डालो॥
अज्ञान तम सब दूर भगाओ।
ज्ञान ज्योति हृदय में लाओ॥
अंतःकरण शुद्धि कर दाता।
भक्ति भाव बढ़ाओ माता॥
जो नर नारी ध्यान लगावे।
मनवांछित फल वही पावे॥
संकट कटे मिटे सब पीरा।
जो सुमिरे काली भवानी धीरा॥
काली कृपा जब होई।
भय न रहे जग में कोई॥
अन्नपूर्णा रूप तुम्हारा।
भरे भंडार सदा हमारा॥
दुष्ट दलन करुणा की धारा।
भक्त जनों का तुम सहारा॥
शरण पड़े जो चरण तुम्हारे।
दूर करो भय संकट सारे॥
नवदुर्गा में रूप तुम्हारा।
पालन करती जग सारा॥
तेरी महिमा वेद बखाने।
देव ऋषि सब शीश नवाने॥
कठिन काल में तुम सहाई।
स्मरण करूँ तो दौड़ी आई॥
मन मंदिर में ज्योति जलाओ।
मोह अंधेरा दूर भगाओ॥
शक्ति स्वरूपिणी जगदम्बा।
रखो सदा अपने चरणों तले हम्बा॥
काली काली नाम तुम्हारा।
सुनते मिटे अंधियारा॥
जो यह चालीसा गावे।
भय बंधन से मुक्त हो जावे॥
भक्ति भाव से पाठ जो करई।
दुख दरिद्र निकट न धरई॥
सुख संपत्ति घर में आवे।
काली कृपा से सब बन जावे॥
संतन की तुम सदा रखवाली।
दुष्टन को क्षण में दे डाली॥
शांति सौभाग्य देहु अपारा।
भक्तन जीवन हो उजियारा॥
जो नित पाठ करे मन लाई।
ताकी रक्षा करे महाकाली॥
अंत समय जो नाम तुम्हारा।
मुक्ति पावे भव से न्यारा॥
काली चालीसा पाठ हमारा।
स्वीकार करो माँ संकट हारा॥
दोहा
काली चालीसा जो पढ़े, श्रद्धा सहित मन लाय।
माँ काली की कृपा से, सुख शांति घर आय॥
