श्री राम चालीसा (Ram Chalisa) भगवान श्री राम की मर्यादा, करुणा, धर्मनिष्ठा और आदर्श जीवन का दिव्य वर्णन करती है। यह चालीसा भक्तों के कष्ट, भय, संकट, मानसिक अशांति और जीवन की बाधाओं को दूर करने में अत्यंत सहायक मानी जाती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ राम चालीसा का नियमित पाठ करने से जीवन में साहस, धैर्य, सकारात्मक सोच और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
विशेष रूप से राम नवमी, मंगलवार, शनिवार तथा किसी भी शुभ कार्य के आरंभ से पहले राम चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। भगवान श्री राम की कृपा से साधक को सुख, शांति, पारिवारिक समृद्धि, सम्मान और जीवन में सफलता प्राप्त होती है। प्रभु श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, इसलिए उनकी उपासना व्यक्ति को आदर्श चरित्र, सत्यनिष्ठा और उच्च संस्कारों की ओर प्रेरित करती है, जिससे जीवन सुखमय और कल्याणकारी बन जाता है। 🚩🙏
श्री राम जय राम जय जय राम 🙏
Jai Shree Ram
श्री राम चालीसा (Shri Ram Chalisa) एक पवित्र Hindu Devotional स्तोत्र है, जिसमें भगवान श्री राम की मर्यादा, धर्म, करुणा, शौर्य और आदर्श जीवन का सुंदर वर्णन किया गया है। Ram Chalisa Hindi में प्रभु श्री राम की आराधना और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत प्रभावशाली साधन मानी जाती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ राम चालीसा का नियमित पाठ करने से जीवन में भय, संकट, मानसिक अशांति और नकारात्मक परिस्थितियों से रक्षा होती है।
विशेष रूप से राम नवमी, मंगलवार, शनिवार तथा किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ से पहले राम चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है। भगवान श्री राम की कृपा से साधक को सुख, शांति, पारिवारिक समृद्धि, सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की उपासना व्यक्ति को सत्य, धर्म और आदर्श जीवन के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है, जिससे जीवन में स्थिरता, सफलता और दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है। 🚩🙏
श्री राम जय राम जय जय राम 🙏
दोहा
श्री रघुवीर चरण सरोज, रज निज मन मुकुर सुधारि। बरनउँ रघुवर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥
चौपाई
जय जय जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो संतजन प्रतिपाला॥
दशरथ तनय कौशल्या नंदन। सीता पति जग के आनंदन॥
अयोध्या पुरी के तुम स्वामी। मर्यादा पुरुषोत्तम नामी॥
करुणा सागर दीन दयाला। भक्त जनन के तुम रखवाला॥
पितु वचन मान वन को धाए। सीता लक्ष्मण संग बन जाए॥
वन में राक्षस दल संहारे। ऋषि मुनि सब भय से उबारे॥
सुग्रीवहि मित्रता कर लीन्ही। बाली वध कर कीर्ति प्रवीन्ही॥
सेतु बांधि लंका पर छाई। रावण दलन विजय पताका लहराई॥
सीता जी को मान बढ़ायो। राम राज्य धरती पर लायो॥
जहाँ न दरिद्र न दुखी कोई। सब नर नारि सुखी सब होई॥
राम नाम अमृत रस धारा। जो जपे मिटे भव दुख सारा॥
दोहा
श्री राम कृपा कटाक्ष से, मिटे पाप सब भारी। जो श्रद्धा से पाठ करे, हो भवसागर से पारि॥